शेरकोट । पिता की ड्यूटी के दौरान मौत के बाद मृतक आश्रित कोटे में नौकरी पाने की उम्मीद लगाए बैठे कुलदीप कुमार का इंतजार 23 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ। विभागीय स्तर पर लंबे प्रयास के बावजूद नौकरी न मिलने पर अब उन्होंने अपनी आवाज शासन तक पहुंचाने के लिए धामपुर से लखनऊ तक पैदल यात्रा शुरू कर दी है। कुलदीप का कहना है कि वह लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री के जनता दरबार में प्रार्थना पत्र देकर अपनी समस्या रखेंगे।
गांव शहजादपुर निवासी कुलदीप ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय अमीचंद चांदपुर स्थित आयुर्वेदिक यूनानी अस्पताल में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। 18 दिसंबर 1990 को ड्यूटी के दौरान उनका निधन हो गया था। कुलदीप का आरोप है कि पिता की मौत के समय विभाग पर उनका करीब छह माह का वेतन भी बकाया था। उन्होंने बताया कि पिता ने चांदपुर से अन्य स्थान पर स्थानांतरण की मांग भी की थी, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी।
कुलदीप के मुताबिक पिता की मौत के बाद से ही वह मृतक आश्रित कोटे में नौकरी पाने के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटते रहे। उनका दावा है कि इस दौरान करीब पांच से छह लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन नौकरी का इंतजार खत्म नहीं हुआ।
19 सितंबर को शुरू की पैदल यात्रा
कुलदीप ने 19 सितंबर को धामपुर तहसील से लखनऊ के लिए पैदल यात्रा शुरू की। वह प्रतिदिन करीब 40 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं और रात में गुरुद्वारा, मंदिर अथवा धर्मशाला में ठहर रहे हैं। बुधवार को उन्होंने बताया कि यात्रा सीतापुर जिले के सिधौली कस्बे तक पहुंच चुकी है। एक-दो अक्टूबर तक लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री के जनता दरबार में अपनी मांग रखने का प्रयास है।
दो बेटियों और एक बेटे के पिता कुलदीप का कहना है कि बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के बीच 23 साल से चल रहा संघर्ष अब उन्हें पैदल लखनऊ तक ले आया है। उन्हें उम्मीद है कि शासन स्तर से उनकी समस्या का समाधान होगा।
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