थाना नगीना पुलिस ने नवजात/मासूम बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त (मानव तस्करी) करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 14 माह के एक मासूम बालक को सकुशल बरामद करते हुए उसके सगे माता-पिता, बिचौलियों और बच्चे को खरीदने वाली महिला सहित कुल 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इस घिनौने सौदे में निजी अस्पतालों में काम करने वाले दो कथित डॉक्टर भी शामिल थे, जिन्होंने रुपयों और बच्चे का लेन-देन कराया था। बरामद बच्चे को पुलिस ने परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
मामा की तहरीर पर दर्ज हुआ था मुकदमा
प्रकरण के अनुसार, 28 सितंबर को ग्राम भूरापुर थाना नगीना निवासी ताजूद्दीन पुत्र मेहन्दी हसन ने थाने में तहरीर दी थी। ताजूद्दीन का आरोप था कि उसकी बहन शबनम पत्नी फरमान (निवासी ग्राम नैनपुरा) ने अपने 14 माह के बेटे को पालन-पोषण के बहाने शफीकन और फरीद (निवासी नैनपुरा) को सौंपा था, लेकिन उन्होंने साठगांठ कर बच्चे को अन्य लोगों के हाथ बेच दिया है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर बीएनएस और किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर जांच शुरू की।
2 लाख में खरीदा और 5 लाख में हरिद्वार की महिला को बेचा
पुलिस विवेचना और आरोपियों से हुई पूछताछ में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। आरोपी दंपति शबनम और फरमान के पहले से 4 बच्चे थे। बाद में उनके जुड़वा बच्चे (एक लड़का और एक लड़की) पैदा हुए।
आर्थिक तंगी के चलते उन्होंने 15 दिन के जुड़वा पुत्र को बेचने का मन बनाया और बिचौलिया शफीकन के माध्यम से 28 अगस्त 2025 को 2 लाख रुपये लेकर बालक को जितेन्द्र कुमार उर्फ विक्की, कपिल उर्फ राजवीर व शिवानी को सौंप दिया।
इसके बाद गिरोह ने बहादराबाद (हरिद्वार) निवासी सलोचना पत्नी प्रीतम सैनी जिनकी कोई संतान नहीं थी, उन्हें बच्चा गोद दिलाने के नाम पर 5 लाख रुपये में सौदा तय किया।
रुपयों का लेन-देन रोनक हॉस्पिटल में डॉ. कपिल द्वारा और बच्चे का लेन-देन पीयूष हॉस्पिटल में डॉ. जितेन्द्र द्वारा कराया गया।
5 लाख रुपये की रकम बिचौलियों ने आपस में (एक-एक लाख रुपये) बांट ली। बाद में जब बच्चे के माता-पिता को 5 लाख में सौदा होने का पता चला, तो उन्होंने विरोध जताया, जिस पर उन्हें शांत रखने के लिए 1.5 लाख रुपये अतिरिक्त दिए गए थे।
ये 6 अभियुक्त हुए गिरफ्तार
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को दबोच लिया। जितेन्द्र कुमार उर्फ विक्की पुत्र रोहताश निवासी ग्राम नन्दपुर, नगीना, कपिल उर्फ राजवीर पुत्र रोहताश निवासी ग्राम नन्दपुर, नगीना, फरमान पुत्र शाहिद (बच्चे का पिता, निवासी नैनपुरा, नगीना),
शबनम पत्नी फरमान (बच्चे की मां, निवासी नैनपुरा, नगीना), शफीकन पत्नी फरीद (बिचौलिया, निवासी नैनपुरा, नगीना), सलोचना पत्नी प्रीतम सैनी (खरीदार, निवासी ग्राम बहादुर सैफी, थाना बहादराबाद, हरिद्वार)
अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी जितेन्द्र उर्फ विक्की के खिलाफ मेडिकल एक्ट (बिना डिग्री प्रैक्टिस/फर्जीवाड़ा), दुष्कर्म, एससीएसटी एक्ट और मानव तस्करी के 3 मुकदमे दर्ज हैं। वहीं कपिल उर्फ राजवीर पर भी मेडिकल एक्ट सहित 3 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सराहनीय कार्य करने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक धर्मेन्द्र सिंह, उपनिरीक्षक अजीत कुमार, उपनिरीक्षक सुक्रमपाल राणा, हेड कांस्टेबल वरुण, विरेन्द्र, ब्रिजेश, कांस्टेबल निर्दोष, ललित, सुशान्त तथा महिला आरक्षी मीनाक्षी, स्वाति और मोनिका शामिल रहीं। पुलिस ने सभी आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई पूरी कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
14 दिन के नवजात का 5 लाख में सौदा करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, एसपी ने दी पूरे मामले की विस्तृत जानकारी
एसपी के सीयूजी नंबर पर आई कॉल से खुला मानव तस्करी का नेटवर्क;
अस्पताल कर्मियों और दाई की मिलीभगत से हरिद्वार के परिवार को बेचा गया था बच्चा
बिजनौर । जनपद के थाना नगीना क्षेत्र में नवजात शिशु की खरीद-फरोख्त (मानव तस्करी) के एक बेहद चौंकाने वाले और संवेदनशील प्रकरण का बिजनौर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) बिजनौर ने पत्रकार वार्ता में खुलासा करते हुए बताया कि अस्पताल कर्मियों और बिचौलियों की मिलीभगत से हरिद्वार के एक परिवार को 5 लाख रुपये में बेचे गए बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया गया है तथा माता-पिता सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
एसपी के सीयूजी नंबर पर आई गुप्त सूचना से शुरू हुई जांच
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि उनके सीयूजी मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात कॉलर द्वारा सूचना दी गई थी कि नगीना क्षेत्र में बच्चा चोरी/तस्करी का एक गंभीर मामला दबाया जा रहा है और उसमें लाखों रुपयों के लेनदेन के साथ आपसी समझौते (सेटलमेंट) का प्रयास चल रहा है।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने तत्काल अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) को मामले की विस्तृत व गोपनीय जांच सौंपी। जांच टीम द्वारा जब मामले से जुड़े वीडियो और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया, तो पूरे नेटवर्क की कड़ियां खुलती चली गईं।
14 दिन के नवजात का 5 लाख में हुआ था सौदा
एसपी बिजनौर ने बताया कि घटनाक्रम करीब एक वर्ष पूर्व का है। नगीना क्षेत्र निवासी शबनम और फरमान के पहले से चार बच्चे थे, जिसके बाद उनके जुड़वा बच्चे (एक लड़का व एक लड़की) पैदा हुए। आर्थिक तंगी के चलते उन्होंने 14 दिन के बेटे को बेचने का फैसला किया।
सफीकन नामक दाई के माध्यम से स्थानीय अस्पताल में कार्यरत जितेंद्र, कपिल और शिवानी ने बच्चे को हरिद्वार के एक निसंतान परिवार को 5 लाख रुपये में बेचने का सौदा तय कराया।
दलालों ने हड़पे 3 लाख, बंटवारे के विवाद में खुला राज
एसपी ने खुलासा किया कि 5 लाख रुपये में से बच्चे के माता-पिता को महज 2 लाख रुपये ही दिए गए, जबकि 3 लाख रुपये बीच के दलालों ने आपस में बांट लिए थे। जब बच्चे के माता-पिता को यह बात पता चली कि उनके बच्चे का सौदा 5 लाख रुपये में हुआ है और उनके मनमाफिक परिवार के पास भी बच्चा नहीं गया, तो उन्होंने ऐतराज जताया और दोबारा पंचायत बिठाकर अधिक रुपयों की मांग की। इसी आपसी विवाद और रुपयों की खींचतान के दौरान पूरा मामला पुलिस के संज्ञान में आ गया।
पुलिस रिमांड पर लेकर होगी आगे की पूछताछ
एसपी ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल जितेंद्र और कपिल का पहले से आपराधिक इतिहास रहा है और उनके खिलाफ पूर्व में भी मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस जरूरत पड़ने पर आरोपियों को पुलिस कस्टडी रिमांड (पीसीआर) पर लेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस गिरोह ने पूर्व में भी नगीना या आसपास के अस्पतालों से किसी अन्य बच्चे की अवैध खरीद-फरोख्त की है।
'कारा' के माध्यम से ही वैध है बच्चा गोद लेना: एसपी की अपील
पुलिस अधीक्षक ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि किसी भी बच्चे की खरीद-फरोख्त कानूनन संगीन अपराध होने के साथ-साथ मानवाधिकारों का घोर हनन है। भारत सरकार की वैधानिक संस्था 'कारा' (CARA - Central Adoption Resource Authority) के निर्धारित नियमों व विधिक प्रक्रिया के तहत ही बच्चा गोद लिया जा सकता है। गैरकानूनी तरीके से बच्चे का लेन-देन करने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी।
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