बिजनौर।जनपद में जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक रसूखदारों को मिली सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद पुलिस प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। नए पुलिस कप्तान केके बिश्नोई के निर्देश पर अनावश्यक रूप से गनर लेकर घूम रहे 20 से अधिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा वापस ले ली गई है। सुरक्षा से मुक्त किए गए पुलिसकर्मियों को अब थानों में कानून-व्यवस्था, गश्त और अपराध नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों में तैनात किया जाएगा।
जिले में करीब 50 जनप्रतिनिधियों व नेताओं को शासन, पुलिस और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा (गनर) उपलब्ध कराई गई थी। कमान संभालने के बाद नवागत पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई ने पुलिस बल की उपलब्धता और बेसिक पुलिसिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा कराई। अधिकारियों ने प्रत्येक व्यक्ति की मौजूदा परिस्थितियों और वास्तविक खतरे (थ्रेट असेसमेंट) का आकलन किया। जांच में जिन लोगों को सुरक्षा की वास्तविक आवश्यकता नहीं पाई गई, उनके गनर तत्काल प्रभाव से वापस बुला लिए गए।
सत्ता पक्ष के कई बड़े नाम भी शामिल
गनर वापसी की इस कार्रवाई में सत्ता पक्ष से जुड़े कई प्रमुख नेताओं के सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस प्रशासन की इस निष्पक्ष कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि सुरक्षा व्यवस्था किसी राजनीतिक पद, प्रतिष्ठा या व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि केवल वास्तविक खतरे के आधार पर ही सुनिश्चित की जाएगी।
थानों और गश्त में बढ़ेगी नफरी
अनावश्यक वीआईपी ड्यूटी से हटाए गए 20 से अधिक पुलिसकर्मियों को अब जिले के थानों, चौकियों और फील्ड ड्यूटी में भेजा जाएगा। इससे थानों में लंबे समय से चली आ रही पुलिस बल की कमी दूर होगी और आम जनता की सुरक्षा व रात्रि गश्त को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
एसपी केके बिश्नोई का बयान:
"सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा के बाद अनावश्यक रूप से तैनात सुरक्षाकर्मियों को हटाया गया है। सुरक्षा किसी की प्रतिष्ठा का पैमाना नहीं है; यह केवल वास्तविक खतरे के आकलन के आधार पर ही दी जाएगी। समय और परिस्थिति बदलने पर समीक्षा निरंतर जारी रहेगी और आवश्यकतानुसार आगे भी बदलाव किए जाएंगे।"
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